नेपाल-भारत के बीच क्यों आ गयी दूरियाँ !!

नेपाल भारत का सबसे पुराना साथी रहा है लेकिन जब कुछ दिन पहले नेपाल ने अपना एक नया नक्शा प्रकाशित किया तो भारत ने उस पर आपत्ति जताई जिसके पीछे मुख्य: कारण यह था की उसमे कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख जो की उत्तराखंड के हिस्से में आते है को अपने देश का अंग बताया, विदेश मंत्रालय ने कहा की ये नक्शा भारत को मंजूर नहीं है।

Political map of Nepal released by the country on May 20, 2020

ये सारा विवाद कालापानी जो की लिपुलेख के इलाके में है जिसे भारत अपना हिस्सा बताता है और नेपाल उसे अपना हिस्सा बताता है और कुछ वक़्त पहले भारत ने यहाँ एक रोड का भी उद्घाटन किया था जिसके बाद से ये विवाद और बढ़ गया ।

इतिहास

यह जो इलाका है ये भारत, तिब्बत और नेपाल के बीच का इलाका है और रणनीति के विचार से ये इलाका भारत के लिए बहुत जरुरी है क्यूंकि ये इलाका काफी ऊंचाई पर है तो यहां से चीन पर नज़र बनाये रखना भी आसान होता है, 1950 से भारत की वहां 17 आर्मी यूनिट्स थी जिसे नेपाल के विरोध के बाद भारत ने 1970 में हटा दिया परन्तु एक यूनिट जो की कालापानी पर थी उसे वही रहने दिया और चूँकि वहां के महाराज महेंद्र बीर बिक्रम शाह देव उस वक़्त भारत को नाराज़ नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने भी इस एक यूनिट पर कोई आपत्ति नहीं जताई और 1990 में जब नेपाल में सरकार आयी तो उन्होंने इस चीज़ का विरोध किया हालाँकि भारत ने कभी भी आधिकारिक रूप से उस क्षेत्र पर कोई दावा पेश नहीं किया है।

हाल में हुई कुछ घटनाये

साल 2019 में जब जम्मू और कश्मीर और लेह-लद्दाख को अलग अलग किया गया तो भारत ने अपने नक़्शे में बदलाव किये और कालापानी के इस इलाके को इसमें जोड़ा गया, चूँकि नेपाल शुरू से इसे विवादित जमीन कहता था पर चूँकि भारत ने इसे आधिकारिक तौर पर अपना हिस्सा बताया, इसके अलावा ऊपर लिखी हुई घटनाये भी इसमें शामिल है।

India’s new political map (left) includes the territory of Kalapani. Nepal’s official map (right) also shows Kalapani inside its border. Photo: India’s home ministry and Nepal’s survey department
नेपाल की प्रतिक्रिया

जिसके बाद नेपाल ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी जो की बहुत ही अलग थी, जैसा की हमने शुरू में बताया नेपाल ने भी अपना नया नक्शा जारी किया जिसमे उसने इस ज़मीन को नेपाल का हिस्सा बताया पर इसके अलावा एक और बयान भी है जिसमे वहां के प्रधान मंत्री KP Sharma Oli ने भारत पर इल्ज़ाम लगते हुए कहा की इटली या चीन से नहीं बल्कि भारत से आये हुए कोरोना वायरस से हमे ज्यादा हानि हुई है, ये अलग इसलिए भी है क्यूंकि जहां पूरी दुनिया चीन को इस वायरस के लिए दोषी करार कर रही है उसके विपरीत ऐसा बयान कुछ अजीब है और एक बात ये भी है की पहले भी भारत नेपाल के बीच इस तरह की बातें हुई है लेकिन हर बार बातचीत से मुदा सुलझ गया था पहली बार नेपाल ने कुछ इस प्रकार की प्रतिक्रिया दी है।

इन प्रतिक्रियाओं के पीछे के दो मुख्य: कारण
  • पहला मुख्य: कारण है चीन की नेपाल की राजनीती में दखलंदाजी – नेपाल में कम्युनिस्ट सरकार एक लम्बे समय से उभर रही थी और अब वो सत्ता में भी है जब वो 2008 में सत्ता में आयी थी तो भारत नेपाल के बीच हुए 1950 के समझौते को भी उन्होंने तोड़ने की मांग रखी थी।
Maoist To Scrap India – Nepal Treaty

ऐसा कहा जाता है की अभी 2018 में वहां की दो कम्युनिस्ट पार्टियों को चीन के मदद के द्वारा मिलाकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनाई गयी और चीन लगातार उनसे संपर्क में बने रहता है ताकि उनके बीच किसी तरह का विवाद न हो अभी हाल ही में चीन के कुछ अधिकारी नेपाल के अधिकारियो से इसी सिलसिले में मिले थे ।

यहाँ तक की भारत के आर्मी चीफ का भी ये मानना है की नेपाल कभी भी खुद के दम पर भारत के इतना खिलाफ नहीं जायेगा उसे जरूर किसी न किसी का समर्थन प्राप्त है।

  • दूसरा मुख्य: कारण वहां की अंतरिम राजनीती भी है जैसा की हमने बताया वहां की दो कम्युनिस्ट पार्टियों ने मिलाकर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनाई जिसमे से एक को प्रधानमंत्री बना दिया गया परन्तु दूसरे को कोई पद न मिला, अत: ऐसे बयान दे कर वहां के वर्त्तमान प्रधानमंत्री अपने आपको एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में दिखाना चाहते है जिनके नेतृत्व में ही नेपाल आगे बढ़ पायेगा।

हालंकि भारत ने यह पक्ष रखा है की वो नेपाल से बात-चीत करेगा लेकिन ये देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा की क्या ये मुद्दा सिर्फ भारत और नेपाल के बीच का है या कोई तीसरा देश इसमें अपना फायदा खोज रहा है।

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