CPEC हो सकती है- “Trillion Dollar Blunder”

वर्ष 2015 में, चीन के साथ बेहतर व्यापार, क्षेत्र के देशों को आगे बढ़ाने तथा पाकिस्तान के भीतर बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए China–Pakistan Economic Corridor (CPEC), जैसे बड़े पैमाने पर द्विपक्षीय परियोजना शुरू की गई थी। परंतु अब चीन की इस महत्वकांक्षी परियोजना CPEC को करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्या है China–Pakistan Economic Corridor (CPEC)?

CPEC चीन के Belt And Road Initiative (BRI) की प्रमुख परियोजनाओ में से एक है। यह चीन के सीक्यांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगी, जिससे चीन की पहुंच अरब सागर तक हो जाएगी।

This Image Is Taken From Dawn News Paper

CPEC का लक्ष्य पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बदलना था। अपनी सड़क, रेल, वायु और ऊर्जा परिवहन प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए – और ग्वादर और कराची के गहरे समुद्र में स्थित पाकिस्तानी बंदरगाहों को चीन के शिनजियांग प्रांत और उससे आगे के ओवरलैंड मार्गों से जोड़ना।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के रास्ते कॉरिडोर के निर्माण पर शुरुआती लागत 46 बिलियन डॉलर थी मगर अब बढ़कर उसका खर्च 87 बिलियन डॉलर हो गया है। हालांकि इस परियोजना का एक चौथाई काम पूरा हो चुका है। कॉरिडोर के कर्ज का हिस्सा 80 बिलियन डॉलर है, जिसका 90 फीसद भार पाकिस्तान को उठाना होगा। पाकिस्तान चीन को ये रकम वापस करने की स्थिति में नहीं है, जिसका मतलब है पाकिस्तान धीरे-धीरे अपनी जमीन की संप्रभुता खो देगा।

हाल के वर्षों में CPEC एक झूठे आधार पर साबित हुआ है कि एक राष्ट्र को समृद्ध होने के लिए इन बड़े पैमाने पर आर्थिक परियोजनाओं की आवश्यकता है। अब यह स्पष्ट है कि कोई भी इन परियोजनाओं के लिए भुगतान करने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि वे इससे कोई पैसा नहीं कमाएंगे।

विवादस्पद परियोजना:

CPEC परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। जैसे कि वित्त, व्यापार असंतुलन, बलूच राष्ट्रवादियों का विरोध, ग्वादर पोर्ट के पास के निवासियों की ने चिंता जताई है। खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभा द्वारा CPEC के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था जिसमें परियोजनाओं का निर्माण किया जाना है। पिछले महीने अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने भी परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए थे।

भारत और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ने वाला है:

यह मार्ग चीनी उत्पादों को शंघाई और अन्य केंद्रों से यूरोप और अमेरिका तक ले जाएगा।

चीनी उत्पादों को कवर करने की दूरी 12000 किलोमीटर कम हो जाएगी।

यदि भारत और चीन के बीच युद्ध होता है, तो बाद में CPEC के परिणामस्वरूप अपनी सेना को सीमा पर स्थानांतरित करना आसान होगा।

UAE ने CPEC के संबंध में अपनी चिंताओं को दिखाया क्योंकि दुबई दुनिया के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक है।

इससे पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के लिए बेहतर आर्थिक विकास होगा।

भारत भी करता रहा है विरोध:

भारत द्वारा भी इसका विरोध किया जाता रहा है। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस परियोजना को आतंकवाद विकास और सृमद्धि के लिए जबरदस्त खतरा बताया है। यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान से होते हुए जायेगा। यातायात और ऊर्जा का मिला-जुला यह प्रोजेक्ट समंदर में बंदरगाह को विकसित करेगा जो भारतीय हिंद महासागर तक चीन की पहुंच का रास्ता खोल देगा।

अंतरराष्ट्रीय कानून भी CPEC की राह में हैं रोड़े:
The Image Has Been Taken From The Hindu News

अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक चीन, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कोई निर्माण नहीं कर सकता क्योंकि ये हिस्सा भारत के क्षेत्र में होने की वजह से वैधता प्रदान है। कश्मीर पर भी 1948 प्रस्ताव के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा मानता है। दूसरी तरफ परियोजना के सामने अक्साई चीन भी सबसे बड़ी रुकावट है, जिसे पाकिस्तान ने कब्जा कर चीन को सौंप दिया था। चीन भारत की बिना अनुमति के अक्साई चीन के रास्ते किसी तरह का निर्माण नहीं कर सकता।

हाल ही में पूर्वी लद्दाख में “वास्तविक नियंत्रण रेखा” के साथ गतिरोध के दौरान, भारत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपने क्षेत्र में किसी भी तरह की घुसपैठ को स्वीकार नहीं करेगा और घुसपैठियों से निपटने की क्षमता रखता है। इसलिए, जैसा कि विशेषज्ञों का कहना है, CPEC को जल्द ही “Trillion Dollar Blunder” के रूप में जाना जाएगा, क्योंकि यहां चीन कीमत निर्धारित करता है, पाकिस्तान को बिल मिलता है और घटिया बुनियादी ढांचे के साथ समाप्त होता है जो यह सेवा नहीं कर सकता है।

ऐसा लगता है कि CPEC कार्य शुरू होने से पहले ही विफल हो गया है। एक तरह से, भूमि अतिक्रमण के लिए चीनी रणनीति और भूमि कब्जाने की पाकिस्तान की इच्छा का अंत हो सकता है।

Leave your comments