यज्ञसेनी द्रौपदी पर रचित कविता

… द्रौपदी …

यज्ञ की अग्नि से वो जन्मीं थी,
यज्ञसेनी नाम उसका।
कृष्ण की सखी वो,
कृष्णे कहकर वो पुकारे।
पंचाल की वो सुंदरी,
मृग से उसके नयन।

बम भोले की वर से,
मिले पांच वर उसे।
महाकाव्य की रचना का,
एक कारण वह भी।

स्त्री की मान की वो प्रतीक,
स्त्री की संघर्ष की वो कहानी,
खुले केश उसके,
एक स्त्री की बदले की निशानी।


This poem has been written by

Ankita Sinha

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