Boycott China क्या पूरी तरह संभव है ?

कई दिनों से ये चर्चा सोशल मीडिया, न्यूज़ चैनल्स और हर जगह चल रही थी की हमे चीन में बने चीज़ो का बहिष्कार करना चाहिये लेकिन क्या ये चीज़ संभव है चलिए इस लेख में इस मुद्दे पर विस्तार में चर्चा करते है।

पहला सवाल ये है की ये बहिस्कार जरुरी क्यों है ?

चीन दुनिया के हर कोने में अपने क्षेत्र को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है दुनिया के कई देशो के साथ बॉर्डर पर उनका विवाद चल रहा है जैसे भारत के साथ अरुणाचल प्रदेश और लदाख में, साउथ चीन समुद्र में, जापान में, वियतनाम में एक तरीके से कहा जाये तो मलेशिया से भूटान तक लगभग हर एक पड़ोसी के साथ उनका विवाद चल रहा है।

जिन देशो के साथ उनका विवाद नहीं है उन्हें वो इतना क़र्ज़ दे देते है की एक तरह से वो उस क़र्ज़ के आधार पर उनके इलाको पर कब्ज़ा कर सकते है इसे DEBT TRAP DIPLOMACY कहते है, इन सभी देशो में चीन से World Bank और IMF से भी ज्यादा लोन दे कर रखे है, और आपको लगता है की ये चीज़ काम नहीं करती तो ईस्ट अफ्रीका के शहर Djibouti को देख लीजिये जहां उसकी 70% GDP क़र्ज़ में है।

तो ये चीज समझना कोई मुश्किल नहीं होगी, कि चीन का हमारे चारों ओर बढ़ता प्रभाव हमारे लिए क्यूं घातक हो सकता है।

दूसरा सवाल ये आता है की इस बार इस विरोध ने इतना जोर क्यों पकड़ लिया ?

SONAM WANGCHUK ने कुछ दिनों पहले YouTube पर एक वीडियो डाली जिसमे उन्होंने पुरे विस्तार से बताया की क्यों हमे चीन में बनी चीज़ो का विरोध करना चाहिये, उनकी इस पुकार पर बॉलीवुड के भी कई सितारों ने उनका सपोर्ट किया।

तीसरा सवाल ये बनता है की चीन का बहिस्कार करना कितना संभव है ?

भारत और चीन के बीच करीब करीब 100 Billion का व्यापार हुआ है 2019 में और इसमें भारत का TRADE DEFICIT 2018 में 56.77 Billion Dollar का है, अगर मोबाइल इंडस्ट्री की बात करे जैसे की Xiaomi, OPPO, VIVO तो उनका भारत में हिस्सा 53% है 2017 से, Solar Energy से उपयोग में लायी जाने वाली चीज़ो का मार्किट 90% का है इसके अलावा भी कई क्षेत्र है जहां चीन का पूरी तरह से दबदबा है अब इसका विरोध हमारे यहां दो तरह की परिस्थितियां उत्पन्न कर सकता है एक सकारात्मक और एक नकारात्मक, सकारात्मक चीज़ ये है की इनको न इस्तेमाल करने से इनका निर्माण भारत में शुरू होगा, और भारत अपने R&D ( Research And Development ) पर ज्यादा खर्च करेगा, परन्तु नकारात्मक पहलु ये है की शुरुवाती वक़्त में ये बेरोजगारी का एक महत्वपूर्ण कारण बनेगा।

आखिरी और सबसे बड़ा सवाल हम क्या कर सकते है ?

इसका एक ही जवाब है दुनिया में ऐसी कोई चीज़ नहीं है जो भारतीय नहीं कर सकते, इससे जुडी सबसे बढिया कहानी है 1977 की जब उस वक़्त के उद्योग मंत्री जॉर्ज फ़र्नान्डिस ने IBM और COCA-COLA को देश से बाहर कर दिया तब हर जगह ये डर था की अब भारत में कंप्यूटर के पार्ट्स कौन सप्लाई करेगा और उसी वक़्त एक भारतीय कंपनी WIPRO ने इसका भार संभाला और COCA-COLA की जगह ली THUMBS-UP ने, अगर वर्त्तमान के कुछ उदाहरण दूँ, तो आपने जरूर सुना होगा की एक वक़्त हम PPE KITS दुनिया के अलग अलग इलाको से मंगवा रहे थे, आज हम दुनिया में उसके दूसरे सबसे बड़े निर्यातक बन गए है वो भी केवल दो महीनो में, इसके अलावा एक दिलचस्प कहानी है छत्तीसगढ़ की जहाँ पर महुआ नाम का एक फूल उगता है जो की देशी शराब बनाने में उपयोग होता है एक व्यक्ति के मदद से वहां की महिलाओ ने इससे Hand Sanitizer बनाया और अपने पुरे गांव में इसका वितरण किया अब तो वो इसे पुरे राज्य में भेजती है।

यह कहानियां हमे यही बताती है की अगर भारत चाह ले तो किसी भी तरह के कार्य को अंजाम दे सकता है बस जरूरत है दृढ़ निश्चय की क्यूंकि ये बात आपसे या मुझसे भी छुपी नहीं है की आत्मनिर्भर भारत जिसकी चर्चा मोदी जी ने कुछ दिनों पहले की वो इसी तरह संभव है, क्यूंकि आधिकारिक तौर पर सरकार इस तरह के विरोध का साथ नहीं दे सकती क्यूंकि इससे द्विपक्षीय वार्ता में दिक्कत हो सकती है परन्तु ये पूरी तरह से हमारे ऊपर है की हम क्या इस्तेमाल करे और क्या नहीं, और एक जरुरी बात ये भी है की इस पुरे लेख में मैंने जो भी बाते की है वो भविष्य में आपके द्वारा लिए गए कदम होने चहिये

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