पुरे देश में क्यों बढ़ रहे है, पेट्रोल डीजल के दाम

पिछले 16 दिनों में देश में पेट्रोल डीजल की कीमते बहुत तेज़ी से बढ़ी है, अगर हम देश की राजधानी दिल्ली की बात करे तो पेट्रोल की कीमत 8.5 रूपए बढ़ गयी है और डीजल की कीमत 10 रूपए के करीब, तो चलिए इस लेख में इसी मुद्दे पर बात करते है।

ये तेल का सारा मसला शुरू होता है Crude Oil यानि कच्चे तेल से, जो की भारत ज्यादातर अपनी खपत के लिए बाहर से आयात करता है और ये मात्रा है करीब – करीब 80%

ये Crude Oil आता है Barrel में,
1 Barrel = 159 लीटर
और इस वक़्त एक बैरल की कीमत है करीब 40 $, इसको साधारण शब्दों में समझा जाये तो 1 लीटर कच्चे तेल की कीमत होगी करीब 19 रूपए, लेकिन फिलाल लगभग हर राज्य में तेल की कीमत है 79 से 80 रूपए ।

तो अपने कभी सोचा ये अंतर क्यूं आता है ।
क्यूंकि Crude Oil, 3 चरणों से होकर गुजरता है ।
1. Refined ( शुद्ध )
2. Transport ( परिवहन )
3. Storage ( भंडारण )

पर इसके बावजूद भी तेल जो की आपके पास के पेट्रोल पम्प में मिलता है मुश्किल से 30 रूपए लीटर के करीब होना होना चाहिए, तो फिर इतना बड़ा अंतर क्यों तो इसके पीछे जो मुख्य: अंतर आता है वो है टैक्स का जो की केंद्र और राज्य दोनों सरकार लेती है, जिसके कारण ये और महंगा हो जाता है।

तो वो कारक जो की इन दामों के बढ़ने या घटने के लिए जिम्मेदार है।
  1. Crude Oil का मूल्य
  2. केंद्र की तरफ से लगाया गया कर
  3. राज्य सरकारों की तरफ से लगाया गया कर
  4. USD vs. INR यानि डॉलर बनाम रुपया

डॉलर बनाम रुपया इसलिए क्यूंकि Crude Oil हमेशा डॉलर्स में मिलता है, और अगर रूपये की कीमत कम हो तो तो Crude Oil की कीमत बढ़ जाएगी।

अब सरकार इन चीज़ो को प्रबंधन करने के लिए जिस विधि का इस्तेमाल करती है वो है Price Decontrol, जिसके तहत आपको तेल का उतना मूल्य देना पड़ेगा जितना मार्किट में कच्चे तेल का मूल्य चल रहा हो।

तो ये तरीका है आपतक तेल को उपलब्ध कराने का, लेकिन इसमें दिक्कत ये है, की अभी कुछ दिनों पहले आप सभी ने सुना होगा की तेल की कीमतों में भरी गिरावट आयी, कोरोना वायरस की वजह से।

लेकिन सरकारों ने इसपर दाम काम नहीं किये, इसके विपरीत मार्च के महीने में 3 रूपए टैक्स बढ़ाये और 82 दिनों के लिए मूल्य को स्थायी कर दिया।

इस बीच कच्चे तेल का मूल्य और कम हुआ, पर मई 5 को सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपये / लीटर, डीजल पर 13 रुपये / लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया, लेकिन हमे इससे ज्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा क्यूंकि हमारे लिए मूल्य को सरकार ने 82 दिनों तक स्थायी कर दिया था, तो जो भी लाभ हुआ वो सरकार के खाते में गया।

मगर अब जब धीरे धीरे लॉकडाउन खुलने लगा, तो मांग बढ़ने लगी जिस कारण कच्चे तेलों के दाम बढ़ गए और 7 जून से हमारे लिए भी मूल्य बढ़ गए, तो जब कच्चे तेल के दाम कम हुए तो फायदा हुआ सरकार को और जब दाम बढे तो नुकसान हुआ आम जनता को।

यह बात सही है कि आम आदमी को यहां कोई फायदा नहीं हुआ, और चूँकि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने अपने टैक्स को बढ़ाया, तो तेल के दाम बहुत ही ज्यादा बढ़ गए, लेकिन सचाई ये भी है की शायद उनके पास कोई दूसरा रास्ता था भी नहीं, क्यूंकि लॉकडाउन के कारण वैसे ही उनकी आमदनी के सारे जरिये बंद थे, इसके अलावा अलग-अलग योजनाओं को चलाने के लिए पैसो की जरूरत होती है, तो इन परिस्थियों में ये ही उपाय रहते है, सरकार की आमदनी के लिए।

अब शायद उम्मीद ये होगी की सरकार इन मूल्यों को थोड़ा सा कम कर दे, ताकि आम जनता की कुछ समस्या कम हो, और चूँकि आमदनी के दूसरे साधन शुरू हो चुके है, तो सरकार की कोशिश यही रहेगी की लोगो को भी राहत दी जाये।

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