देश को समर्पित देश के नाम रचित…

मैं कलम से अपनी ईमान लिख दूँगा।

मैं कागज़ के पन्नो पर पैग़ाम लिख दूंगा।
बिना सोचे कोई अंजाम लिख दूंगा।
नही! मैं खुदगर्ज़ी नही लिखता।
मैं फैसला-ए-अवाम लिख दूंगा।
लिखूं ऐसा बंद तेरे बाजार हो जाए।
लिखूं ऐसा की जीना तेरा दुस्वार होजाये।
जो ना माने इतने में वतन के ऐ दुश्मन,
चढ़कर छाती में तेरे लड़ाकू विमान लिख दूंगा।

Courtesy : K Tanusha


ये क्या! तुमने कागज़ पे दो चार तारीफे लिखी है?
मैं आसमान में हिंदुस्तान की शान लिख दूंगा ।
और तुम झंडे पर अपने तारे दिखाते हो?
मैं उन्ही तारो से हिंदुस्तान लिख दूंगा ।


This amazing poem has been written by

Danish Parwez Khan

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