Farm Bill 2020

आजादी के 75 साल बाद भी हमारे देश के किसानों की हालत वही है। हर पांच सालों में चुनाव होते है, नए-नए सरकार अपने मेनिफेस्टो में किसानों के लिए कर्ज माफ़ी, सही कीमत में अनाज की बिक्री जैसी बड़ी-बड़ी बाते करते है, और चुनाव जीतने के बाद कुछ भी नही करते। सदियों से ऐसा ही चले आ रहा है, या तो सरकार किसानों के बारे में सोचना नही चाहती या फिर हमेशा के लिए इसे चुनावी मुद्दा बनाये रखना चाहती है। तभी तो इतने सालों बाद भी हमारे देश के किसानों को दो वक़्त की रोटी भी ठीक से नसीब नही हो पाती है।

पिछले सप्ताह देश की सरकार ने किसानों के लिए संसद में नया बिल पास किया। जिसके बाद से कई लोग इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे है। कुछ लोग इस बिल को किसान विरोधी बिल कह रहे है, तो कुछ लोग इसे किसान के लिए किसान के पक्ष में देखते है। तो चलिए आज हम इस बिल के हर पहलू के बारे में अध्ययन करेंगे।

क्या है Farm Bill

17 सितंबर को देश की संसद में कृषि विधेयक के 2 बिल पेश किए गए और तीसरा संशोधन बिल था।

1. The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020: प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसानों को अपने उत्पाद नोटिफाइड ऐग्रिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (APMC) यानी तय मंडियों से बाहर बेचने की छूट देना है।

  • यह बिल किसानों को स्वतंत्र रूप से अपनी फसलो को किसी को भी, कही भी बेचने की अनुमति देती है।
  • यह बिल किसानों को मंडियों के बाहर बेचने की भी सुविधा देता है। राज्य सरकारों के मंडियों के बाहर की गई कृषि उपज की बिक्री और खरीद पर टैक्स लगाने से रोकता है।
  • किसान अन्य राज्य के लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों के साथ भी सौदे कर सकते हैं।
  • इससे बाजार में प्रतिस्पर्धी नेस बढ़ेगा और किसानों को उनकी उपज के अच्छे दाम मिलेंगे।
  • इस विधेयक के तहत पैन नंबर रखने वाला कोई भी व्यापारी व्यापार कर सकता हैं।
  • यह बिल One Nation One Market को बढ़ावा देगा और किसानो को उनकी उपज देश भर में बेचने की अनुमति देगा।

2.  Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill, 2020: इस बिल में फसल की बुवाई से पहले, किसान अपने फसलो को तय कीमत पर बड़े-बड़े कृषि फार्मों तथा निर्यातको को बेचने की सुविधा प्रदान कराता है।

  • पहले किसान को अपनी फसल बर्बाद होने का जोखिम रहता था जो कि अब कम हो जाएगा।
  • किसान अब अच्छे उत्पादों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और विशेषज्ञों का उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ सीधे बिक्री या व्यावसायिक समझौतों में प्रवेश कर सकेंगे।
  • एक कंपनी या व्यवसायी के साथ बिक्री के बाद उत्पादन का फैसला किया जाता है, खरीददार अच्छी फसल उपज के लिए आवश्यक साधन या इनपुट प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होगा।
  • खरीदार द्वारा उचित कृषि मशीनरी और उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी।खरीददार किसान को तकनीकी मार्गदर्शन और सलाह देगा और फसल जोखिम के लिए पूर्ण आंशिक जिम्मेदारी लेगी।
  • फसल उत्पादन के दौरान, फसल का स्वामित्व किसान के पास रहेगा और फसल का बीमा किया जाएगा और किसान जरूरत पड़ने पर वित्तीय संस्थानों से ऋण भी ले सकेगा।
  1. Essential Commodities (Amendment) Bill 2020: यह प्रस्तावित बिल है जिसमे कुछ संशोधन किए गए है।
    पहले व्यापारी किसानों से फसल कम दामों में खरीद कर जमाखोरी और काला बाजारी करते थे। इस कालाबाजारी को रोकने के लिए यह कानून बनाया गया था। अब इस कानून संसोधन के तहत सरकार कुछ फसल जैसे अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को सूची से हटाना चाह रही है। सरकार का मानना है कि इन सब चीजो के स्टॉक के कारण किसानों को बेहतर मूल्य नही मिल पाता।
इसका विरोध क्यों हो रहा है?

इस बिल का विरोध ज्यादातर पंजाब और हरियाणा में हो रहा है। किसानों का कहना है, की मंडियों से बाहर बेचने के विकल्प से मंडियों की अहमियत कम हो सकती है, और पंजाब और हरियाणा में मंडिया काफी व्यवस्थित होती हैं। आपको बता दे पंजाब और हरियाणा में मंडिया काफी बड़े स्तर पर लगाई जाती हैं। चूंकि अब सरकार किसानों को अपने इच्छा अनुसार बेचने की स्वतंत्रता दे रही है, तो किसानों को यह डर ही कि मंडियो का महत्व कम हो सकता हैं। इसके अलावा कुछ और भी चीज़े है जिसको लेकर किसान काफी चिंतित है-

मंडिया खत्म हो जाएगी?

कुछ लोगो का कहना है कि, इस बिल को लागू करने से मंडिया खत्म कर दी जाएगी। परंतु ऐसा बिल्कुल व नही है, मंडियो को खत्म नही किया जा रहा है। वह बिल्कुल पहले की ही तरह रहेगी। किसानों को एक ओर विकल्प दिया जाएगा ताकि वे अपनी फसल मंडियों के बाहर भी बेच पाए ताकि वे ज्यादा लाभ कमा पाए।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में बड़ी-बड़ी कंपनीया किसानों का शोषण करेगी?

लोगों को यह लग रहा है कि, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों का शोषण किया जाएगा। उनसे उनकी जमीन ले ली जाएगी। परंतु बिल में यह लिखा गया है कि किसान अपने जमीन को गिरवी या लीज पर नही रखेगे। फसलों का मूल्य पहले से ही तय कर लेंगे। फसल का स्वामित्व किसान के पास ही रहेगा। वे जब चाहे इस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ सकते है और उसके लिए उन्हें कोई पेनल्टी भी नही भरनी पड़ेगी।

MSP (Minimum Support Price ) खत्म हो जाएगी?

न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य यानी MSP किसी फसल का वह दाम होता है जो सरकार बुवाई के वक्‍त तय करती है। इससे किसानों को फसल की कीमत में अचानक गिरावट के प्रति सुरक्षा मिलती है। अगर बाजार में फसल के दाम कम होते हैं तो सरकारी एजेंसियां एमएसपी पर किसानों से फसल खरीद लेती हैं। यह बिल MSP को बिल्कुल भी प्रभावित नही करेगी।MSP सिस्टम जैसा था वैसा ही रहेगा। इसके अलावा यह Price Agreement के तहत फसल की मूल्य सुनिश्चित करता है, और Payment Failure जैसी स्थिति में जुर्माना का प्रावधान करता है।

किसानों को किस प्रकार फायदा मिलेगा?
  • किसान जिला और राज्य के बीच व्यापार कर सकते हैं। एजेंट्स को कमीशन दिए बिना किसान सीधे प्राइवेट कंपनियों के साथ व्यापार कर सकते हैं। इससे किसानों को ज्यादा फायदा मिलेगा।
  • इस बिल के आने से One Nation One Market का सपोर्ट मिलेगा। जिसकी वजह से किसान अपनी फसल बड़े-बड़े फ़ूड कंपनियों के साथ हाथ मिलाकर फायदा कमा सकती है।
  • Contract Agreement से किसानों को Fixed Price की सुनिश्चितता मिलेगी।
  • यह बिल आत्मनिर्भर कृषि को बढ़ावा देगा।
  • किसान जिला और राज्य के बीच व्यापार कर सकते हैं।
  • Middle Man से आज़ादी मिलेगी। अक्सर किसान को होने वाले फायदे बिचोलियों को मिल जाते है। Middle Man किसान से कम दामो पर फसल खरीद कर बाजारों में उसे दुगने-तिगुने दामो पर बेचते है, जिससे किसान को उनके फसल का सही दाम नही मिल पाता।
  • अपनी मर्जी से फसल बेचने की सुविधा अर्थात खेत के गेट पर बेचने की स्वतंत्रता परिवहन खर्चों को दूर करेगी, और इस तरह से आय को बढ़ावा देगी।

कुल मिलाकर यह बिल देश के कई हिस्सों में अपनाया जा रहा है, और कुछ हिस्सों इसका विरोध हो रहा हैं। विरोधी दल जो इस बिल का विरोध कर रहे है, सड़क जाम कर रहे है तथा ट्रैक्टर जला रहे है, उन्हें सरकार से सदन में बात करनी चाहिए। उनके द्वारा लग रहे त्रुटियों को सरकार से साझा करें। सरकार को भी दूसरे पक्ष की बात सुनकर इसका हल निकालनी चाहिए। अपनी राजनीति को अलग रख कर देश की हर पार्टी को किसान के बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि वह देश कभी भी समृद्धि की राह पर नही चल सकता जिस देश मे किसान गरीब हों।

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