Corona Vaccine Distribution Plan

एक ओर जहां दुनिया साल के शुरुवात से ही कोरोना से लेकर परेशान थी, साल के अंत आते-आते कोरोना की वैक्सीन आ जाने से राहत आई है। कुछ देशों में वैक्सीन दिया जाना शुरू हो चुका हैं। ऐसे में भारत मे भी केंद्र सरकार ने वैक्सीन लगाने से पहले की तैयारियों में जुट गई हैं। तो चलिए आज हम अपने इस लेख में वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन की तैयारिया तथा आने वाली चैलेंजेस के बारे में पढेंगे।

पिछले महीने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वैक्सीन बनाने वाली 3 कंपनियों का दौरा कर जायजा लिया था। उन्होंने अहमदाबाद के जाइडस बायोटेक पार्क, हैदराबाद में भारत बायोटेक (Bharat Biotech) और पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (serum institute) जाकर वैज्ञानिकों और डॉक्टर्स की टीम से मुलाकात की थी और वैक्सीन के प्रोग्रेस के बारे में रिपोर्ट ली थी।

वैसे तो भारत को वैक्सीन का पावरहाउस कहा जाता हैं। भारत में बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं, यहां दुनिया भर की 60 प्रतिशत वैक्सीन बनती हैं।

यहां आधे दर्जन वैक्सीन निर्माता मौजूद हैं, जिनमें दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल है। भारत की अगले साल जुलाई तक वैक्सीन की 50 करोड़ डोज़ बनाने और 25 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने की योजना है। लेकिन सरकार के समक्ष कई सारी चुनौतियां होंगी।

भारत के लिए चुनौतियां:
1. भारत की आबादी

भारत, दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश, चीन के 1.4 बिलियन के बाद, दूसरा सबसे बड़ा देश लगभग 1.30 बिलियन लोगों का घर हैं। छोटे-छोटे देशों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती आसान रहने वाली है, लेकिन 130 करोड़ आबादी के लिए यह काम काफी चुनौतीपूर्ण होगा। देश के कोने-कोने प्रत्येक राज्य में हरेक इंसान को वैक्सीन पहुँचाना काफी मुश्किल भरा काम होगा।

2. वैक्सीन का संग्रहण

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी वैक्सीन का संगग्रहं चूंकि भारत की आबादी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाली देश मे ऐसे में वैक्सीन के डोज़ो की संख्या भी काफी होगी। ऐसे में उनके रखरखाव में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

जिनमें से कई वैक्सीन को रखने के लिए -70 डिग्री के कोल्ड स्टोरेज की जरूरत होगी। भारत में 27,000 कोल्ड स्टोर्स हैं जहां से संग्रहित की गईं वैक्सीन को 80 लाख स्थानों पर पहुंचाया जा सकता हैं। देश में जितनी संख्या में वैक्सीन की ज़रूरत होगी, उतनी ही संख्या में अपने आप नष्ट हो वाली सीरिंज (इंजेक्शन) की भी ज़रूरत होगी ताकि उनके दोबारा इस्तेमाल और किसी तरह के संभावित संक्रमण को रोका जा सके।

इन सबके अलावा भारत में आम तौर पर होने वाले टीकाकरण कार्यक्रम को पूरा करने के लिए क़रीब 40 लाख डॉक्टर और नर्सों की ज़रूरत होती है, लेकिन, कोविड-19 के टीकाकरण के लिए और ज़्यादा लोगों की ज़रूरत पड़ेगी।

इन सारे चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम की तैयारी काफ़ी पहले से कर रही है। देश के सभी राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक, तथा वैक्सीन बनाने वाले कंपनियों में जाकर वहां बन रहे वैक्सीन में कितने समय औऱ लगेंगे इसका जायजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिया।

सरकार के द्वारा की जा रही तैयारियां

भारत सरकार ने कोल्ड चेन में बढ़ोतरी और सीरिंज, सुई की खरीद तथा बनाने के आदेश दिए हैं। टीकाकरण अभियान के लिए, Covid-19 वैक्सीन भंडारण के लिए 29000 कोल्ड चेन पॉइंट, 240 वॉक-इन कूलर, 70 वॉक-इन फ़्रीज़र, 45000 आइस-लाइनेड रेफ्रिजरेटर, 41000 डीप फ़्रीज़र्स और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर का उपयोग किया जाएगा, और इसके लिए, “टीकाकरण के सभी आवश्यक संसाधन राज्यों को पहुंचा दिए गए हैं।”

  • पीएम मोदी ने राज्यों से उन्हें टीका वितरण पर एक विस्तृत योजना भेजने को कहा है प्रधानमंत्री ने राज्यों से कहा है कि, वे Covid-19 वैक्सीन के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं स्थापित करें और उन्हें इस बारे में विस्तृत योजना भेजने की बात कही है, कि वे कैसे वैक्सीन को समाज के सबसे निचले स्तर तक ले जाएंगे।
  • वैक्सीन के लिए आपूर्ति श्रृंखला बेहतर की जा रही हैं। मेडिकल और नर्सिंग के छात्रों एवं शिक्षकों को टीकाकरण कार्यक्रम के प्रशिक्षण एवं कार्यान्वयन में शामिल किया जाएगा। सभी कदमों तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि भारत के हरेक व्यक्ति तक टीके की पहुंच सुनिश्चित किया जा सके।
  • वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है और राज्य एवं जिला स्तर के हितधारकों के साथ साझेदारी के जरिये इसका परीक्षण किया जा रहा है।
  • हाल में राज्यों को जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक Covid वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (CoVIN) प्रणाली का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए सूचीबद्ध लाभार्थियों का पता लगाने में किया जाएगा। टीकाकरण जिस स्थान पर होगा, वहां प्राथमिकता में रखे गए केवल पहले से पंजीकृत लोगों का ही टीकाकरण होगा और उसी स्थान पर पंजीकरण कराने की सुविधा नहीं होगी।
  • सरकार ने Covid-19 टीकाकरण के अनुसंधान एवं विकास का समर्थन करने के लिए कोविड सुरक्षा मिशन के तहत 900 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है।
  • टीकाकरण के दिशा-निर्देश के अनुसार, एक दिन में प्रत्येक सत्र में 100-200 लोगों का टीकाकरण होगा। टीका देने के बाद 30 मिनट तक निगरानी की जाएगी। टीकाकरण स्थल पर एक समय में केवल एक व्यक्ति को अनुमति होगी।
किसे मिलेगी सबसे पहले वैक्सीन?

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण (Union health secretary Rajesh Bhushan) ने मुख्यमंत्रियों को सूचित किया कि केंद्र की योजना है कि पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण किया जाएगा, उसके बाद पुलिस कर्मियों और स्वच्छता कर्मचारियों और उसके बाद 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को शामिल किया जाएगा। चौथे चरण में ऐसे व्यक्तियों को टीका लगाया जाएगा जो पहले से ही किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। जैसे भारत में सात करोड़ लोगों को डायबिटीज है, ये आंकड़ा पूरी दुनिया में दूसरे नंबर है, ऐसे इन्हें भी पहले वैक्सीन देने की श्रेणी में प्राथमिकता मिली हैं।

कब तक आएगी वैक्सीन?

भारत में विकसित की जा रहीं 30 वैक्सीन में से पांच का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। इनमें से एक है ऑक्सफ़र्ड और एस्ट्राज़ेनिका की वैक्सीन जिस पर फिलहाल भारत के सीरम इंस्टीट्यूट में ट्रायल चल रहा है। भारत बायोटेक एक स्वदेशी कोरोना वैक्सीन विकसित कर रही है।भारत में पांच टीके विकास के उन्नत चरणों में हैं। इनमें से 4 दूसरे एवं तीसरे चरण में हैं जबकि  एक टीका पहले/दूसरे चरण में है। ICMR के एक वैज्ञानिक ने कहा था कि टीका फरवरी या मार्च में लॉन्च किया जा सकता है।

भारत बायोटेक का कहना हैं कि, देर से परीक्षणों के परिणाम आने की वजह से टीके की मार्च और अप्रैल के बीच आने की उम्मीद हैं।

भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में देश के प्रत्येक व्यक्ति को वैक्सीन के 2 डोज़ देना वह भी 30 दिन के अंतराल के भीतर सरकार के लिए चुनौती भरा कार्य होगा।

परंतु जहां कई देशों के पास इस अनुभव का अभाव है, भारत के पास पोलियो की सफलता का अनुभव हैं। कोरोना के शुरुआती दौर में भी यह अनुमान लगाया गया था, कि भारत संकट को संभालने में सक्षम नहीं होगा, लेकिन कोरोनावायरस और प्रयासों के खिलाफ इसकी लड़ाई ने दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की है।

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