103 साल का हुआ जमशेदपुर, जानिए कब, कैसे और क्यों साकची का नाम जमशेदपुर हुआ?

Jamsetji Tata’s Dream city ‘JAMSHEDPUR’ completed 103 years of it’s nameing in 2022.

जमशेदजी टाटा के सपनों का शहर ‘जमशेदपुर’ आज अपने नामकरण के 103 साल पूरा करने जा रहा है। देश के पहले Pre Planned City से देश के सबसे स्वच्छ शहर तक का सफर जमशेदपुर ने इन 103 सालों में तय किया है। आज हम जमशेदपुर में जो भी सुविधाएं देख रहे है ये सभी जमशेदजी टाटा के दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है। जिन्होंने आज से 100 से भी अधिक वर्ष पहले ही शहर की रूपरेखा तय कर दी थी। ये तो सभी लोग जानते है कि जमशेदपुर का नाम टाटा ग्रुप के संस्थापक सर जमशेदजी टाटा के नाम पर रखा गया है। लेकिन ये बहुत कम लोग ही जानते है कि कब, किसने और क्यों साकची इलाके का नाम बदलकर जमशेदपुर रख दिया।

क्यों साकची में की गयी टाटा स्टील की स्थापना?

(Why they decided to built a steel factory in Sakchi?)

History of Tata Steel
बात है सन् 1903 की जमशेदजी टाटा कुछ ब्रिटिश व्यापारियों के साथ मिलकर भारत में एक स्टील कंपनी की स्थापना करना चाहते थे। इसके लिए वो उपयुक्त जगह की तलाश कर रहे थे। साल 1904 में जमशेदजी टाटा के निधन के बाद उनके बेटे दोराबजी टाटा ने उनके सपनों को पूरा करने का जिम्मा उठाया। उन्होंने तत्कालीन मयूरभंज राज्य के बाबाघाटी क्षेत्र के गुरूमहिषानी पहाड़ियों को इस्पात उद्योग की स्थापना के लिए मुख्य स्थल के रूप में चुना । वजह थी यहाँ स्टील बनाने के लिए उपयोग होने वाला हेमेटाइट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था। जिसके बाद स्वर्णरेखा और खरकई नदी के किनारे स्थित साकची नामक एक आदिवासी इलाके में स्टील उद्योग की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। उस समय साकची इलाका जंगल से घिरा हुआ एक छोटा आदिवासी गाँव था। इसके बाद सन् 1907 में टाटा स्टील की स्थापना की गयी।

Image: tata.com
क्यों साकची का नाम जमशेदपुर रखा गया?

(Why lord Chelmsford rename sakchi to jamshedpur?)

Tata steel’s contribution in First world war.
टाटा स्टील की स्थापना के कुछ समय बाद ही सन् 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध शुरू हो गया। युद्ध शुरू होते ही स्टील की मांग अचानक से बढ़ गयी। टाटा स्टील ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश आर्मी को लगभग 3,00,000 टन स्टील सप्लाई किया। इसके अलावा युद्ध में आवश्यक सामानों, गोल-बारूद और सैनिकों को पहुँचाने के लिए 1,1,500 मील की पटरी रेलवे को उपलब्ध करवायी और जीत में अहम भूमिका निभायी।

विश्वयुद्ध में टाटा स्टील की महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए युद्ध खत्म होने के बाद 2 जनवरी 1919 को भारत के तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड चेलमस्फोर्ड ने टाटा स्टील का दौरा किया। इसी दौरान उन्होंने टाटा ग्रुप के संस्थापक जमशेदजी टाटा के सम्मान में साकची का नाम बदलकर जमशेदपुर रखा।

Image : tata.com
शहर के अलावा इन जगहों के भी पूरे हो रहे 103 साल

(Tatanagar Station and JUSCO also completed its 103 year in 2022)

लॉर्ड चेलमस्फोर्ड (Lord Chelmsford) ने अपने दौरे के दौरान सिर्फ शहर का ही नाम नहीं बदला बल्कि यहाँ के रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर टाटानगर (Tatanagar Station) रखा। पहले इसे कालीमाटी स्टेशन ( Kalimati Station) के नाम से जाना जाता था।

स्टेशन के अलावा शहर की आधारभूत सुविधाओं का ध्यान रखने वाले JUSCO की स्थापना भी सन् 1919 में हुई थी। जिसके तब टाउन डिवीज़न के नाम से जाना जाता था। जमशेदपुर देश का इकलौता शहर है जहां 10 लाख से अधिक आबादी रहती है लेकिन कोई म्युनिसिपल कारपोरेशन नहीं है। पार्क, सड़क, नाली से लेकर कचरा प्रबंधन तक सब जुस्को द्वारा ही किया जाता है।

जमशेदजी टाटा ने सिर्फ एक फैक्ट्री के निर्माण का नहीं बल्कि एक ऐसे शहर का भी सपना देखा था जहां सड़क, बिजली, पानी, साफ सफाई से लेकर खेल के मैदान और पार्क सभी मौजूद हो। आज जमशेदजी टाटा का वो सपना सार्थक नज़र होता आ रहा है।

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