Staff Member

A Toxic Revealation?

After the demise of one of the Bollywood actor Sushant Singh Rajput, a certain kind of culprit game can be seen in media where the baton of blame is being passed from one person to another.  In one of the recent media trials, Rhea Chakraborty girlfriend of late Sushant Singh Rajput was being blamed for …

A Toxic Revealation? Read More »

SIGNIFICANCE OF A SECULAR TONE

Amid the demand of removal of the word secular from the Constitution, advent of the demeaning word ‘sickular’ or TV anchor openly accepting of not being a secular on national TV news debate, where they are expected to take a neutral stand. The question arises is what the meaning, implication and application of the word …

SIGNIFICANCE OF A SECULAR TONE Read More »

स्त्री की अंतहीन पीड़ा पर रचित कविता

मैंने जीना सीख लिया है उड़ते हुए इन पंखों को,मैंने समेटना सीख लिया है,ऊंचे नीचे इन लहरों में,मैंने बहना सीख लिया है। जीवन के हर रंगो से दूर,मैंने रहना सीख लिया है,अपने राहों के हर काटों को,मैंने सहना सीख लिया है। चुकाना मैंने सीख लिया है,निभाते रिश्तों के हर क़र्ज़ को,कहने वाली बातें अपनी,मैंने दिल …

स्त्री की अंतहीन पीड़ा पर रचित कविता Read More »

व्यक्ति की आशाओं और सपनों पर आधारित कुछ पंक्तियाँ

सपनों की तलब मेरे सपनों ने कभी मुझे सोने ना दिया ।ख्वाहिशों को कभी पूरा होने ना दिया ।हर अधूरी हसरतों ने एक कदम आगे खींचा मुझे ।सफर में तन्हाइयों ने, तन्हा कभी होने ना दिया ।मेरे सपनों ने कभी मुझे सोने ना दिया । लड़खड़ाते कदमों ने चलने के मायने बताए,तो गिरते आंसुओं ने …

व्यक्ति की आशाओं और सपनों पर आधारित कुछ पंक्तियाँ Read More »

Hagia Sophia – चर्च,मस्जिद या म्यूजियम ?

गत् शुक्रवार तुर्की हाईकोर्ट ने Hagia Sophia को सन् 1934 में म्यूजियम बनाए जाने के फैसले को गैरकानूनी बताया, तुर्क राष्ट्रपति ने फैसले का स्वागत किया, 24 जुलाई से मस्जिद में नमाज अदा करने का ऐलान किया। हागिया सोफिया का इतिहास तुर्की के इस्तानबुल शहर में स्थित इस म्यूजियम को सन् 1985 में UNESCO के …

Hagia Sophia – चर्च,मस्जिद या म्यूजियम ? Read More »

तू देख शीश पे ज़रा खुद को : जीवन के संघर्ष पर एक कविता

तू देख शीश पे ज़रा खुद को तू देख शीश पे ज़रा खुद कोदेखना अभी बाकी हैमुक्कम्मल होगी हर ख्वाहिशें तेरीबस खुद को पहचानना अभी बाकी है ।। मंज़िलों के रास्ते तो तू देख चुकापर क्यों मंज़िले अब तक दूर हैंहवा बना रहा तू अब तकचल उठ, तूफ़ाँ बनना अभी बाकी है ।। माना कठिनाईयां …

तू देख शीश पे ज़रा खुद को : जीवन के संघर्ष पर एक कविता Read More »

सफ़ेद कोर्ट पहने, इंसान रुपी भगवान

भगवान का एक रूप आज देखा है मैंने अपने भगवान को सफेद लिबास में आज देखा है मैंने अपने भगवान को सफेद लिबास में,अंजानों की जान बचाता ।अपने जीवन को दांव पर लगा के,आज देखा है मैने अपने भगवान को सफेद लिबास में । है उनकी भी जिंदगी,लेकिन फिर भी दिन-रात एक करकेदेते वो हमें …

सफ़ेद कोर्ट पहने, इंसान रुपी भगवान Read More »

बचपन को रौंदती है मजबूरियां, बाल मजदूरी पर रचित ये कविता

जिम्मेदारियाँ मैं मजबूर हूँमैं मजबूर हूँ,जिम्मेदारियों के बोझ तले मैं मजबूर हूँ ।खुशियों को मेरी नजर अंदाज कर,मेरा बचपन मुझसे छिन लिया । इतनी तो मेरी उम्र भी ना थी,जितना  लोगो ने मुझे समझ लिया ।जिम्मेदारियों के बोझ तले मुझे दबा केजिम्मेदारियों के दम पर मेरा बचपन मुझसे छिन लिया ।। था एक खवाब मेरे …

बचपन को रौंदती है मजबूरियां, बाल मजदूरी पर रचित ये कविता Read More »

यज्ञसेनी द्रौपदी पर रचित कविता

… द्रौपदी … यज्ञ की अग्नि से वो जन्मीं थी,यज्ञसेनी नाम उसका।कृष्ण की सखी वो,कृष्णे कहकर वो पुकारे।पंचाल की वो सुंदरी,मृग से उसके नयन। बम भोले की वर से,मिले पांच वर उसे।महाकाव्य की रचना का,एक कारण वह भी। स्त्री की मान की वो प्रतीक,स्त्री की संघर्ष की वो कहानी,खुले केश उसके,एक स्त्री की बदले की …

यज्ञसेनी द्रौपदी पर रचित कविता Read More »