Creative Corner

You have the creativity? We have the platform!
Flaunt your artworks 🎨, poems & writings 🖊, music 🎶​ etc. ​

The Cute First Love Story

“Hey, I Miss You…” Yes, I miss those lovely memorable days,You remember how and where it all began?How you forced me out of the smoky haze!And taught me how love feels in such a short span! The way you looked at me, just like an angel,Ah your sparkling eyes, they’re indeed magical!Once I asked, “Hey, …

The Cute First Love Story Read More »

झठी ज़िन्दगी का सच्चा आइना पेश करती, कविता

है झूठ की ये ज़िन्दगी है झूठ की ये ज़िंदगी ,हां झुठ मैं है जी रहे।हां कह रहे, सब ठीक है,मगर, बस कहने को हैं कह रहे। आस पास भी भीड़ में,कोई पहचाना सा लगता नहीं ।एक डर है पकड़े जाने का,आहट अंजान के आने की है ।हां कह रहे, सब ठीक है,मगर, बस कहने …

झठी ज़िन्दगी का सच्चा आइना पेश करती, कविता Read More »

देश को समर्पित देश के नाम रचित…

मैं कलम से अपनी ईमान लिख दूँगा। मैं कागज़ के पन्नो पर पैग़ाम लिख दूंगा।बिना सोचे कोई अंजाम लिख दूंगा।नही! मैं खुदगर्ज़ी नही लिखता।मैं फैसला-ए-अवाम लिख दूंगा।लिखूं ऐसा बंद तेरे बाजार हो जाए।लिखूं ऐसा की जीना तेरा दुस्वार होजाये।जो ना माने इतने में वतन के ऐ दुश्मन,चढ़कर छाती में तेरे लड़ाकू विमान लिख दूंगा। ये …

देश को समर्पित देश के नाम रचित… Read More »

स्त्री की अंतहीन पीड़ा पर रचित कविता

मैंने जीना सीख लिया है उड़ते हुए इन पंखों को,मैंने समेटना सीख लिया है,ऊंचे नीचे इन लहरों में,मैंने बहना सीख लिया है। जीवन के हर रंगो से दूर,मैंने रहना सीख लिया है,अपने राहों के हर काटों को,मैंने सहना सीख लिया है। चुकाना मैंने सीख लिया है,निभाते रिश्तों के हर क़र्ज़ को,कहने वाली बातें अपनी,मैंने दिल …

स्त्री की अंतहीन पीड़ा पर रचित कविता Read More »

व्यक्ति की आशाओं और सपनों पर आधारित कुछ पंक्तियाँ

सपनों की तलब मेरे सपनों ने कभी मुझे सोने ना दिया ।ख्वाहिशों को कभी पूरा होने ना दिया ।हर अधूरी हसरतों ने एक कदम आगे खींचा मुझे ।सफर में तन्हाइयों ने, तन्हा कभी होने ना दिया ।मेरे सपनों ने कभी मुझे सोने ना दिया । लड़खड़ाते कदमों ने चलने के मायने बताए,तो गिरते आंसुओं ने …

व्यक्ति की आशाओं और सपनों पर आधारित कुछ पंक्तियाँ Read More »

तू देख शीश पे ज़रा खुद को : जीवन के संघर्ष पर एक कविता

तू देख शीश पे ज़रा खुद को तू देख शीश पे ज़रा खुद कोदेखना अभी बाकी हैमुक्कम्मल होगी हर ख्वाहिशें तेरीबस खुद को पहचानना अभी बाकी है ।। मंज़िलों के रास्ते तो तू देख चुकापर क्यों मंज़िले अब तक दूर हैंहवा बना रहा तू अब तकचल उठ, तूफ़ाँ बनना अभी बाकी है ।। माना कठिनाईयां …

तू देख शीश पे ज़रा खुद को : जीवन के संघर्ष पर एक कविता Read More »

सफ़ेद कोर्ट पहने, इंसान रुपी भगवान

भगवान का एक रूप आज देखा है मैंने अपने भगवान को सफेद लिबास में आज देखा है मैंने अपने भगवान को सफेद लिबास में,अंजानों की जान बचाता ।अपने जीवन को दांव पर लगा के,आज देखा है मैने अपने भगवान को सफेद लिबास में । है उनकी भी जिंदगी,लेकिन फिर भी दिन-रात एक करकेदेते वो हमें …

सफ़ेद कोर्ट पहने, इंसान रुपी भगवान Read More »

बचपन को रौंदती है मजबूरियां, बाल मजदूरी पर रचित ये कविता

जिम्मेदारियाँ मैं मजबूर हूँमैं मजबूर हूँ,जिम्मेदारियों के बोझ तले मैं मजबूर हूँ ।खुशियों को मेरी नजर अंदाज कर,मेरा बचपन मुझसे छिन लिया । इतनी तो मेरी उम्र भी ना थी,जितना  लोगो ने मुझे समझ लिया ।जिम्मेदारियों के बोझ तले मुझे दबा केजिम्मेदारियों के दम पर मेरा बचपन मुझसे छिन लिया ।। था एक खवाब मेरे …

बचपन को रौंदती है मजबूरियां, बाल मजदूरी पर रचित ये कविता Read More »

यज्ञसेनी द्रौपदी पर रचित कविता

… द्रौपदी … यज्ञ की अग्नि से वो जन्मीं थी,यज्ञसेनी नाम उसका।कृष्ण की सखी वो,कृष्णे कहकर वो पुकारे।पंचाल की वो सुंदरी,मृग से उसके नयन। बम भोले की वर से,मिले पांच वर उसे।महाकाव्य की रचना का,एक कारण वह भी। स्त्री की मान की वो प्रतीक,स्त्री की संघर्ष की वो कहानी,खुले केश उसके,एक स्त्री की बदले की …

यज्ञसेनी द्रौपदी पर रचित कविता Read More »

बचपन की अठखेलियों पर आधारित, यह कविता!

” मेरा वो मासूम सा बचपन था “ ना साइकिल थी हमरे पास ना घरवाले कार से हमे छोड़ने जाते थे…बस चार दोस्त थे, जिनसे लड़ते झगड़ते‌ हम स्कूल पहुंच जाते थे।ना चाहत ब्रांडेड कपड़ों की ना जरूरत रिमोट कंट्रोल कार की…बस मम्मी की साड़ी पहने और‌ कागज़ की नाव बना के खुश हो जाते।बातों …

बचपन की अठखेलियों पर आधारित, यह कविता! Read More »